जल निकायों को शहरी भूमि उपयोग में बदलने के पर्यावरणीय प्रभाव क्या हैं? उदाहरणों के साथ समझाएं।
(UPSC 2021,10 Marks,)
What are the environmental implications of the reclamation of water bodies into urban land use? Explain with examples.
प्रस्तावना
जल निकाय पुनर्ग्रहण (Water body reclamation) में प्राकृतिक जल विशेषताओं जैसे झीलों, नदियों, या तटीय क्षेत्रों को शहरी भूमि में बदलना शामिल है, जिसका उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है, जिसमें आवासीय, वाणिज्यिक, और औद्योगिक विकास शामिल हैं।
Explanation
Environmental Implications of Water Body Reclamation
1. जैव विविधता की हानि:
- जल निकायों (water bodies) की पुनः प्राप्ति अक्सर प्राकृतिक आवासों के विनाश की ओर ले जाती है, जिसके परिणामस्वरूप विविध पौधों और पशु प्रजातियों की हानि होती है।
- उदाहरण: शहरी विकास के लिए आर्द्रभूमियों (wetlands) को भरने से अद्वितीय आर्द्रभूमि प्रजातियों का गायब होना और पारिस्थितिक संतुलन का विघटन हो सकता है।
2. जलविज्ञान चक्रों (hydrological cycles) का विघटन:
- जल निकायों को बदलने से प्राकृतिक जलविज्ञान चक्रों का विघटन हो सकता है, जिससे जल की उपलब्धता और गुणवत्ता प्रभावित होती है।
- उदाहरण: नदियों को भरने या मोड़ने से नीचे की ओर जल प्रवाह में कमी आ सकती है, जिससे जलीय पारिस्थितिक तंत्र प्रभावित होता है और आसपास की समुदायों के लिए जल आपूर्ति प्रभावित होती है।
3. बाढ़ का बढ़ा हुआ जोखिम:
- जल निकायों की पुनः प्राप्ति प्राकृतिक बाढ़ भंडारण क्षमता को कम कर देती है, जिससे भारी वर्षा के दौरान बाढ़ का जोखिम बढ़ जाता है।
- उदाहरण: बाढ़ के मैदानों (floodplains) को भरने से शहरी क्षेत्रों में बाढ़ की संवेदनशीलता बढ़ सकती है, क्योंकि भूमि की प्राकृतिक अवशोषण और धारण क्षमता खो जाती है।
4. जल प्रदूषण:
- शहरी भूमि उपयोग अक्सर जल निकायों में रासायनिक, सीवेज और ठोस कचरे जैसे प्रदूषकों को पेश करता है, जिससे जल की गुणवत्ता खराब होती है।
- उदाहरण: निर्माण गतिविधियाँ और शहरी अपवाह (urban runoff) पुनः प्राप्त जल निकायों में तलछट, भारी धातु और अन्य प्रदूषकों को पेश कर सकते हैं, जिससे जलीय जीवन और मानव स्वास्थ्य को नुकसान होता है।
5. पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं की हानि:
- पुनः प्राप्त जल निकाय अपनी आवश्यक पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं प्रदान करने की क्षमता खो देते हैं, जैसे जल शुद्धिकरण, कार्बन पृथक्करण (carbon sequestration), और जलवायु विनियमन।
- उदाहरण: शहरी विकास के लिए मैंग्रोव (mangroves) को भरने से तटीय सुरक्षा में उनकी भूमिका समाप्त हो जाती है, जिससे तूफानों और कटाव के प्रति संवेदनशीलता बढ़ जाती है।
6. परिवर्तित सूक्ष्म जलवायु (microclimate):
- जल निकायों का शहरीकरण स्थानीय सूक्ष्म जलवायु को संशोधित कर सकता है, जिससे तापमान में वृद्धि और वायु गुणवत्ता में कमी हो सकती है।
- उदाहरण: झीलों को कंक्रीट से ढके क्षेत्रों में बदलने से शहरी ऊष्मा द्वीप प्रभाव (urban heat island effect) में योगदान हो सकता है, जिससे हीटवेव्स (heatwaves) बढ़ सकते हैं और मानव स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।
7. प्रवास पैटर्न का विघटन:
- जल निकायों की पुनः प्राप्ति जलीय प्रजातियों के प्राकृतिक प्रवास पैटर्न को बाधित कर सकती है, जिससे उनके प्रजनन चक्र और समग्र जनसंख्या गतिशीलता प्रभावित होती है।
- उदाहरण: नदियों में बांधों या बाधाओं का निर्माण मछलियों के प्रवास को बाधित कर सकता है, जिससे मछली की आबादी में गिरावट आ सकती है और मछली पकड़ने वाले समुदायों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
8. सांस्कृतिक और मनोरंजक मूल्य की हानि:
- जल निकायों की पुनः प्राप्ति उनके सांस्कृतिक और मनोरंजक मूल्य को समाप्त कर देती है, जिससे स्थानीय समुदायों की भलाई और जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
- उदाहरण: पारंपरिक मछली पकड़ने के मैदानों या मनोरंजक झीलों को भरने से आसपास के निवासियों के लिए सांस्कृतिक प्रथाओं और मनोरंजक अवसरों की हानि हो सकती है।
Case Studies
- बेलंदूर झील, बैंगलोर: बेलंदूर झील का शहरी विकास के लिए पुनः प्राप्ति (reclamation) करने से बिना उपचारित सीवेज (untreated sewage) और औद्योगिक कचरे (industrial waste) के निर्वहन के कारण गंभीर प्रदूषण हुआ है। झील अत्यधिक प्रदूषित हो गई है, जिससे आसपास के समुदायों के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ा है और पारिस्थितिकीय क्षति (ecological damage) हुई है।
- पवई झील, मुंबई: पवई झील को आवासीय और वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए पुनः प्राप्त किया गया है, जिससे इसके प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र (natural ecosystem) का नुकसान हुआ है। झील की जल गुणवत्ता (water quality) बिगड़ गई है, और परिवर्तित जल निकासी पैटर्न (altered drainage patterns) के कारण आसपास के क्षेत्र में बाढ़ की घटनाएं बढ़ गई हैं।
- हुसैन सागर झील, हैदराबाद: हुसैन सागर झील का शहरी विस्तार के लिए पुनः प्राप्ति करने से इसकी प्राकृतिक सुंदरता और पारिस्थितिकीय कार्यों (ecological functions) का नुकसान हुआ है। झील अब भारी प्रदूषित है, मुख्य रूप से बिना उपचारित सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट (industrial effluents) के निर्वहन के कारण।
- पाम जुमेराह, दुबई: पाम जुमेराह एक कृत्रिम द्वीप (artificial island) है जिसे अरब सागर (Arabian Gulf) के एक महत्वपूर्ण हिस्से को पुनः प्राप्त करके बनाया गया है। इस परियोजना के कारण समुद्री आवासों (marine habitats) का विनाश हुआ है और तटीय प्रक्रियाओं (coastal processes) में परिवर्तन हुआ है, जिससे स्थानीय समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र (marine ecosystem) प्रभावित हुआ है।
निष्कर्ष
जल निकायों (Reclamation of water bodies) को शहरी भूमि में बदलना बढ़ती जनसंख्या की आवश्यकताओं को पूरा करने और पर्यावरण को संरक्षित करने के बीच एक नाजुक संतुलन की मांग करता है।
सतत प्रथाओं (sustainable practices) को अपनाना और पर्यावरणीय प्रभावों (environmental impacts) पर विचार करना प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों (natural ecosystems) के साथ सामंजस्यपूर्ण रूप से सह-अस्तित्व वाले शहरी स्थानों के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है।